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जीवन - अवसर स्वयं को पाने का || आचार्य प्रशांत, संत नागरीदास पर (2014)

2019-11-27 5 Dailymotion

वीडियो जानकारी:<br /><br />शब्दयोग सत्संग<br />१७ दिसम्बर, २०१४<br />अद्वैत बोधस्थल, नॉएडा<br /><br />नीकौ हूँ लागत बुरौ, बिन औसर जो होय।<br />प्रात भए फीकी लगे, ज्यौं दीपक की लोय ।। (संत नागरीदास)<br /><br />प्रसंग:<br />कैसे जाने कोई काम करने का सही अवसर कौनसा?<br />और इस अवसर का सद्पयोग क्या है?<br />यह कैसे जानेंगे की सही कर्म क्या है?<br />जीवन क्या होता है?<br />जीवन को कैसे खुल कर जीये?<br />जीवन में नयापन कैसे लाएँ?<br /><br />संगीत: मिलिंद दाते

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